जीवन रेखा ही हथेली में एक ऐसी रेखा है, जो प्रत्येक व्यक्ति के हाथ में पाई जाती है। यदि किसी के हाथ में यह रेखा न देखने को मिले तो यह
समझना चाहिए कि ऐसे व्यक्ति का व्यक्तित्व शून्यवत् है और उस व्यक्ति की जीवन शक्ति का सर्वथा लोप हो गया है।
ऐसे व्यक्ति का जीवन किसी भी समय समाप्त हो सकता है। कई बार मंगल रेखा चल कर इस रेखा को बल देती है,
कभी-कभी शनि रेखा भी इस रेखा को बल देती हुई दिखाई देती है फिर भी जो जीवन रेखा अपने आप में निर्दोष और स्पष्ट होती है, वास्तव में वही रेखा मानव के लिए कल्याणकारी मानी जाती है।
इसी रेखा से व्यक्ति की आयु का पता चलता है तथा इस रेखा के माध्यम से यह जाना जा सकता है कि जीवन में कौन-कौन सी दुर्घटनाएं किस-किस समय घटित होंगी तथा मृत्यु का कारण और मृत्यु का समय भी इसी रेखा से ज्ञात होता है।
यह रेखा बृहस्पति पर्वत के नीचे से निकलती है पर कई बार यह रेखा बृहस्पति पर्वत के ऊपर से भी निकलती हुई दिखाई दी है। इस रेखा के बारे में यह ध्यान रखना अत्यंत जरूरी है कि यह रेखा शुक्र पर्वत को जितने ही बड़े रूप में घेरती है,
उतनी ही यह रेखा ज्यादा श्रेष्ठ मानी जाती है। यद्यपि कई बार यह रेखा शुक्र पर्वत को अत्यंत संकीर्ण बना देती है, जब ऐसा तथ्य हथेली में दिखाई दे तब यह समझ लेना चाहिए कि इस व्यक्ति की प्रगति जीवन में कठिन ही होगी,
साथ ही साथ इस व्यक्ति को जीवन में प्रेम, भोग, सुख आदि सांसारिक गुणों की न्यूनता ही रहेगी। अंगूठे के पास में से होकर यह रेखा निकले तो उस व्यक्ति की आयु बहुत कम होती है।
जीवन रेखा जितनी ज्यादा गहरी स्पष्ट और बिना टूटी हुई होती है उतनी ही ज्यादा अच्छी कहलाती है। ऐसे व्यक्ति का स्वास्थ्य उन्नत होगा।
उसके हृदय में प्रेम और सौंदर्य की भावना विकसित रहेगी परंतु जिसके हाथ में यह रेखा कटी-फटी या टूटी हुई
अथवा अस्पष्ट दिखाई दे तो उसका जीवन दुखमय,भावना शून्य एवं दुर्घटनाओं से युक्त रहता है। ऐसे व्यक्ति तुनक मिजाज, चिड़चिड़े तथा बात-बात पर क्रोधित होने वाले होते हैं।
यदि गुरु पर्वत के नीचे, जीवन रेखा और मस्तिष्क रेखा का पूर्ण मिलन होता है तो यह शुभ माना जाता है। ऐसा व्यक्ति परिश्रमी, सतर्क और योजनाबद्ध तरीके से काम करने वाला होता है
परंतु यदि इन दोनों रेखाओं का उद्गम अलग-अलग होता है तो व्यक्ति उन्मुक्त विचारों वाला तथा अपनी ही धुन में कार्य करने वाला होता है परंतु यदि किसी के हाथ में जीवन रेखा,
मस्तिष्क रेखा और हृदय रेखा तीनों एक ही स्थान से निकलें तो यह एक दुर्भाग्यपूर्ण प्रतीक होता है। ऐसे व्यक्ति की नि:संदेह हत्या हो जाती है।
जीवन रेखा पर यदि आड़ी-तिरछी लकीरें दिखाई दें तो उस व्यक्ति का स्वास्थ्य कमजोर समझना चाहिए यदि हृदय रेखा और जीवन रेखा के बीच में त्रिभुज बन जाए तो ऐसा व्यक्ति दमे का रोगी होता है।
यदि जीवन रेखा से कोई पतली रेखा निकल कर गुरु पर्वत की ओर जाती दिखाई दे तो उस व्यक्ति में इच्छाएं, भावनाएं और महत्वाकांक्षाएं जरूरत से ज्यादा होती हैं और वह उन इच्छाओं को पूरा करने का भागीरथ प्रयत्न करता है।
यदि इस रेखा पर कई रेखाएं उठती हुई दिखाई दें तो वह परिश्रमी और कर्मठ होता है तथा अपने प्रयत्नों से भाग्य का निर्माण करता है।
यदि जीवन रेखा के प्रारंभ से ही उसके साथ-साथ सहायक रेखा चल रही हो तो ऐसा व्यक्ति सोच-समझ कर कार्य करने वाला, विवेकपूर्वक योजनाएं बनाने वाला, चतुर तथा महत्वाकांक्षी होता है।