विद्या और बुद्धि का विचार जानिये जन्मकुंडली में

विद्या और बुद्धि ये दो ऐसे शस्त्र है जो जिस जातक के पास हो वे स्वयं दूसरे व्यक्तियो को भी जीवन में ठीक मार्ग दिखा सकता है और अपने ज्ञान और बुद्धि के बल पर स्वयं को भी ठीक मार्गदर्शन कर सकता है।विद्या और बुद्धि का विचार मुख्य रूप से पंचम भाव, पंचमेश कारक ग्रह गुरु, बुध से किया जाता है इसके अतिरिक्त विद्या प्राप्ति में अन्य ग्रह भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।
👉पंचम भाव, पंचमेश, बुध और गुरु से बुद्धि और ज्ञान प्राप्ति का विचार किया जाता है। बलवान पंचमेश का बली बुध या बली गुरु से सम्बन्ध लग्न से केंद्र या त्रिकोण में हो तो जातक बुद्धिमान और दुसरो के अभिप्राय का अनुमान अपनी बुद्धि से पता लगा लेता है। 
👉पंचम भाव में बली बुध हो तो जातक अच्छी शिक्षा से संपन्न होता है।पंचमेश बलहीन हो व 6, 8, 12वें भाव में पंचमेश हो तो उचित शिक्षा की प्राप्ति जातक को नही होती ऐसे जातक की शिक्षा बाधित रहती है। 
👉पंचम भाव में सूर्य हो तो जातक की स्थिर बुद्धि, चंद्र हो तो काल्पनिक बुद्धि, मंगल हो और किसी शुभ ग्रह का प्रभाव पंचम भाव पर न हो तो क्रूर बुद्धि होती है, बुध हो तो चंचल और शुभ बुद्धि, शुक्र हो तो कोमल, शनि पंचम में हो तो बुद्धि जड़ अर्थात् कठिन होती है, बली राहु हो तो बुद्धि तीव्र होती है ऐसे जातक दूसरे जातको के मन के भावो को तुरंत समझ व् पढ़ लेते है। 
👉 गुरु विद्या और बुध बुद्धि का कारक है।इन दोनों की युति या दृष्टि सम्बन्ध तथा पंचमेश या पंचम भाव से शिक्षा प्रति के लिए एक उत्तम योग है। 
👉पंचमेश बलवान हो, पंचम भाव में बली शुभ ग्रह हो तो जातक उच्च शिक्षा प्राप्त करता है।ऐसा जातक उचित परामर्शदाता, सद्बुद्धि से युक्त होता है।
👉यदि पंचमेश और बुध बाल या वृद्ध अवस्था में हो तो बुद्धि मंद होती है। 
👉सूर्य बली होकर पंचम भाव या बली पंचमेश से सम्बन्ध करे तो जातक चिकित्सा, पदार्थ विज्ञानं आदि में रुचि रखता है। 
👉चंद्रमा बली होकर पंचम भाव या बली पंचमेश से सम्बन्ध करे तो जातक ओषधि विज्ञानं, साहित्य, कविताये लिखने, रसायन शास्त्र में रुचित रखता है।  
👉मंगल बली होकर पंचम भाव या बली पंचमेश से सम्बन्ध करे तो चिकित्सा छेत्र या तर्क शास्त्र में निपुण अर्थात् तर्क शक्ति विकसित होती है। 
👉बुध बली होकर पंचम भाव या बली पंचमेश से सम्बन्ध करे तो जातक की गणित, अर्थशास्त्र, वाणिज्य, ज्योतिषशास्त्र आदि में रूचि होती है। 
👉बृहस्पति बली होकर पंचम भाव या बली पंचमेश से सम्बन्ध करे तो जातक राजनीतिशास्त्र, संस्कृत, धर्मशास्त्र, न्यायशास्त्र, व्याकरण, में रूचि होती है। 
👉 शुक्र बली होकर पंचम भाव या पंचमेश से सम्बन्ध करे तो जातक ललित कलाओ, काव्य और राजनीतिशास्त्र आदि में रूचि रखता है। 
👉शनि बली होकर पंचम भाव और पंचमेश से सम्बन्ध करे तो जातक विदेशी भाषा, विदेशी शिक्षा, दर्शन शास्त्र, इंजीनिरिंग आदि में रुचि रखता है। 
👉बली और शुभ राहु केतु का सम्बन्ध पंचम भाव और पंचमेश से हो तो जातक गुप्त विद्याओ, तंत्र विद्या आदि में रूचि रखता है। 
👉दो या दो से अधिक ग्रह पंचम भाव या पंचमेश से बली होकर सम्बन्ध करे तो जातक की शिक्षा और रूचि कई विषयो या मिश्रित विषयो में होती हैं।

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