*माथे के अलावा कंठ, भुजा और छाती पर क्यों लगाया जाता है तिलक? जानें क्या है इसका महत्व और लाभ*
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*तिलक से लाभ: पूजा के दौरान हम लोग माथे पर तिलक लगाते हैं. आमतौर पर आपने देखा होगा कि बहुत से लोग माथे के अलावा भुजा और छाती पर भी तिलक लगाते हैं. आइए जानते हैं छाती और भुजा पर तिलक करने के क्या महत्व और लाभ हैं.*
* *छाती पर तिलक लगाने से मन शांत होता है.*
* *भुजा का संबंध शुक्र ग्रह से होता है। यहां तिलक लगाने से शुक्र ग्रह मजबूत होता है.*
*आमतौर पर जब हम लोग पूजा करते हैं तो अपने मस्तक पर तिलक लगाते हैं, लेकिन आपने देखा होगा कि साधु-संत पूजा के दौरान मस्तक के साथ-साथ अपनी भुजाओं, छाती और गले पर भी चंदन या तिलक लगाते हैं. तिलक लगाना हमारे सनातन धर्म की परंपरा है. हिन्दू धर्म में तिलक लगाना अत्यंत महत्वपूर्व बताया गया है. धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, तिलक लगाना पवित्र और लाभकारी होता है. माथे के अलावा गले, छाती और भुजा में तिलक क्यों लगाया जाता है? इसके क्या मायने हैं*
*1. गले या कंठ पर तिलक लगाने का महत्व और लाभ*
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गले पर तिलक लगाना बहुत शुभ माना जाता है. हमारी वाणी का संबंध गले से है, भोजन नली भी गले से पास से जाती है. इन सभी जरूरी भागों को नियंत्रित करने के लिए गले या कंठ में तिलक लगाया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि गले का संबंध मंगल ग्रह से है. मंगल ग्रह को मजबूत करने के लिए गले में तिलक लगाते हैं. गले पर तिलक लगाने से कंठ शांत रहता है और वाणी में मिठास रहती है. ऐसा कहा जाता है कि यहां तिलक लगाने से ईश्वर का वास होता है. सांस की गति शांत होती है और मंगल मजबूत होता है.
*⚜️2. छाती पर तिलक लगाने का महत्व और लाभ*
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कहते हैं कि छाती पर भगवान का वास होता है. यहां तिलक लगाने से ग्रहों की स्थिति मजबूत होती है. व्यक्ति के मन में भय, क्रोध, लालसा, अशांति की समस्या दूर रहती है. छाती पर तिलक लगाने से मन शांत होता है. मन में दुर्भावना नहीं होती है. हृदय में ईश्वर का वास होता है. इसका अर्थ है कि हम ईश्वर को तिलक कर रहे हैं.
*⚜️3. भुजा पर तिलक लगाने का महत्व और लाभ*
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भुजा का संबंध शुक्र ग्रह से होता है. यहां तिलक लगाने से शुक्र ग्रह मजबूत होता है. यहां तिलक लगाने से भगवान भुजाओं में वास करने लगते हैं. अगर किसी जातक का शुक्र ग्रह कमजोर है तो उसे मजबूत करने के लिए भुजा पर तिलक लगाएं. इसके अलावा ऐसा करने से हाथ से जुड़ी बीमारी नहीं होती है. बल और साहस का प्रतीक भी होता है. *#हरिऊँ*